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MSME और सरकारी योजनाएँ · भाग 3 · 14 मिनट · सितंबर 2026

मुद्रा लोन शुरू से आख़िर तक: ₹20 लाख, बिना गारंटी, बिना सब्सिडी — और बैंक असल में क्या देखता है

मुद्रा लोन के लिए बैंक आने वाले ज़्यादातर लोगों के मन में तीन बातें होती हैं। पहली, कि "मुद्रा" कोई सरकारी दफ़्तर है जो लोन देता है। दूसरी, कि इसमें कुछ पैसा सब्सिडी का होता है। और तीसरी, कि जब योजना कहती है "कोई गारंटी नहीं चाहिए", तो बैंक के पास जाँचने को कुछ बचता ही नहीं। तीनों बातें ग़लत हैं, और इनकी वजह से लोगों का समय, पैसा, और कई बार लोन ही चला जाता है। यह लेख पूरी योजना को उसी क्रम में समझाता है जिसमें आप उससे गुज़रेंगे — लोन की चार श्रेणियाँ, कौन पात्र है, कौन-से काग़ज़, कौन-सा पोर्टल, और बैंक की मेज़ पर फ़ाइल कैसे पढ़ी जाती है।

संक्षेप में
  • मुद्रा लोन छोटे ग़ैर-खेती कारोबार के लिए बैंक लोन है, ₹20 लाख तक, चार श्रेणियों में: शिशु, किशोर, तरुण और तरुण प्लस। श्रेणी इस बात से तय होती है कि आपको कितना पैसा चाहिए, इससे नहीं कि कारोबार कितना पुराना है।
  • इसमें कोई सब्सिडी नहीं है। पूरा पैसा ब्याज समेत लौटाना होता है। सरकार की मदद बैंक को दी गई गारंटी है, आपको दिया गया पैसा नहीं।
  • गारंटी नहीं चाहिए, पर जाँच पूरी होती है। बैंक आपकी क्रेडिट रिपोर्ट, कारोबार और कमाई देखता है, और लोन से ख़रीदे गए सामान पर अपना हक़ दर्ज करता है।
  • तरुण प्लस (₹10–20 लाख) सिर्फ़ उन्हीं के लिए है जिन्होंने पहले तरुण लोन लेकर पूरा चुका दिया हो। पहली बार लोन लेने वाला सीधे वहाँ से शुरू नहीं कर सकता।

मुद्रा असल में क्या है

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना 8 अप्रैल 2015 को शुरू हुई, ताकि छोटे कारोबारी — दर्ज़ी, चाय की दुकान, मोबाइल रिपेयर वाला, छोटी वर्कशॉप — बैंक से लोन ले सकें। नाम MUDRA (माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफ़ाइनेंस एजेंसी) से आया है, जो SIDBI की एक सहायक कंपनी है।

नाम का आख़िरी शब्द ध्यान से देखें: रिफ़ाइनेंस। मुद्रा आपको सीधे लोन नहीं देती। वह उन संस्थाओं को सहारा देती है जो लोन देती हैं — सरकारी और प्राइवेट बैंक, ग्रामीण बैंक, स्मॉल फ़ाइनेंस बैंक, सहकारी बैंक, NBFC और माइक्रोफ़ाइनेंस संस्थाएँ। "मुद्रा लोन" का मतलब है इन्हीं में से किसी एक से लिया गया लोन, उसकी अपनी जाँच और उसकी अपनी ब्याज दर पर। इसलिए न कोई "मुद्रा दफ़्तर" है जहाँ जाना हो, और न कोई ऐसा व्यक्ति जो फ़ीस लेकर आपका लोन "पास" करवा दे।

सरकार का असली योगदान एक गारंटी है। पात्र मुद्रा लोन क्रेडिट गारंटी फ़ंड फ़ॉर माइक्रो यूनिट्स (CGFMU) के तहत कवर होते हैं। अगर ऐसा लोन डूब जाए, तो यह फ़ंड बैंक का कुछ नुक़सान भरता है। इसी वजह से बैंक बिना प्रॉपर्टी गिरवी रखे छोटे कारोबार को लोन दे पाता है। यह गारंटी बैंक को बचाती है, लोन लेने वाले को नहीं — यह बात आगे बहुत काम की है।

चार श्रेणियाँ

श्रेणी बस लोन की रक़म का नाम है। इससे यह भी पता चलता है कि योजना कारोबार को किस दौर में मानती है।

श्रेणीलोन की रक़मकिसके लिए ठीक
शिशु₹50,000 तकशुरुआत — पहली मशीन, पहला माल, ठेला, सिलाई मशीन
किशोर₹50,000 से ऊपर, ₹5 लाख तकचलता हुआ कारोबार, जिसे ज़्यादा मशीन, ज़्यादा माल या बेहतर जगह चाहिए
तरुण₹5 लाख से ऊपर, ₹10 लाख तकजमा हुआ कारोबार, जो काम बढ़ाना चाहता है
तरुण प्लस₹10 लाख से ऊपर, ₹20 लाख तकसिर्फ़ वे, जिन्होंने तरुण लोन लेकर ठीक से चुका दिया है

जुलाई 2024 के केंद्रीय बजट में योजना की सीमा ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख की गई, और इसी के साथ तरुण प्लस श्रेणी बनी और गारंटी कवर भी बढ़ाया गया। इसकी शर्त साफ़ है: यह चुकाए गए तरुण लोन का इनाम है, हर किसी के लिए खुला चौथा दरवाज़ा नहीं।

आपको नीचे से सीढ़ी चढ़ना भी ज़रूरी नहीं। जिस कारोबार को सच में ₹3 लाख चाहिए और वह यह दिखा सकता है, वह सीधे किशोर में आवेदन करे। बस इतना ध्यान रखें कि काम जितना सही ठहराता है, उससे ज़्यादा न माँगें — सिर्फ़ इसलिए कि श्रेणी में गुंजाइश है।

कौन आवेदन कर सकता है

योजना में न कोई आय सीमा है, न जाति की शर्त, न पढ़ाई की शर्त। मुद्रा खातों में महिलाओं और SC/ST/OBC कारोबारियों का बड़ा हिस्सा है, और कुछ बैंक उन्हें ब्याज में थोड़ी छूट भी देते हैं, पर लोन हर पात्र कारोबार के लिए खुला है।

2026-27 में योजना की स्थिति मुद्रा एक चालू योजना है, इसकी कोई आवेदन की तारीख़ नहीं होती — आप किसी भी कामकाजी दिन आवेदन कर सकते हैं। यहाँ बताई गई चार श्रेणियाँ और ₹20 लाख की सीमा 2024 के बदलाव के बाद की हैं। ब्याज दर, फ़ीस, मार्जिन और लोन की अवधि हर बैंक अपनी नीति से तय करता है, इसलिए इस लेख के आँकड़े सिर्फ़ उदाहरण हैं, किसी बैंक का ऑफ़र नहीं। अपने बैंक से उसकी मौजूदा शर्तें लिखित में माँगें।

लोन पर ख़र्च कितना आता है

ब्याज। सरकार मुद्रा की कोई ब्याज दर तय नहीं करती। हर बैंक इसे अपने दूसरे छोटे बिज़नेस लोन की तरह तय करता है — आम तौर पर अपनी बेंचमार्क दर और उसके ऊपर आपके जोखिम के हिसाब से कुछ प्रतिशत। एक ही रक़म पर सरकारी बैंक और माइक्रोफ़ाइनेंस संस्था की दर में बड़ा फ़र्क़ हो सकता है, इसलिए तुलना ज़रूर करें।

प्रोसेसिंग फ़ीस। ज़्यादातर बैंक शिशु लोन पर यह नहीं लेते। उससे बड़े लोन पर बैंक की अपनी नीति चलती है, अक्सर हर लाख पर एक तय रक़म।

गारंटी फ़ीस। गारंटी फ़ंड बैंक से हर साल एक फ़ीस लेता है। कुछ बैंक इसे ख़ुद भरते हैं, कुछ ग्राहक से वसूलते हैं। पूछ लें — रक़म छोटी है, पर हर साल लगती है।

मार्जिन। बहुत छोटे लोन पर बैंक अक्सर आपसे कोई हिस्सा नहीं माँगता। बड़े लोन पर आम तौर पर लागत का कुछ हिस्सा आपको ख़ुद लगाना होता है। यह प्रतिशत बैंक का नियम है, योजना का नहीं।

ये सारी बातें उस की फ़ैक्ट स्टेटमेंट (KFS) में लिखी होनी चाहिए जो बैंक साइन करने से पहले देता है। RBI के नियम के अनुसार यह छोटे बिज़नेस के टर्म लोन पर भी ज़रूरी है, सिर्फ़ पर्सनल लोन पर नहीं। जो चार्ज आपको बताया गया था वह उसमें न हो, तो साइन करने से पहले पूछें, बाद में नहीं।

किशोर टर्म लोन · ₹4,00,000 · 11% · पाँच साल · उदाहरण

दो औद्योगिक मशीनों के लिए लोन₹4,00,000

हर महीने की किस्त≈ ₹8,697

पाँच साल में कुल ब्याज≈ ₹1,21,800

सरकार से सब्सिडीशून्य

कारोबार को अपने ख़र्चों के बाद हर महीने कम से कम इतना कमाना होगा₹8,697

बैंक की पूरी जाँच असल में इसी आख़िरी लाइन का जवाब ढूँढती है। आप जो भी काग़ज़ देते हैं, वह इसी सवाल के पक्ष या विपक्ष में सबूत है।

मुद्रा कार्ड, और इससे ब्याज कैसे बचता है

मुद्रा लोन दो तरह का होता है। टर्म लोन से टिकाऊ चीज़ ख़रीदी जाती है — मशीन, गाड़ी, दुकान का फ़र्नीचर — और यह तय किस्तों में चुकता है। वर्किंग कैपिटल लिमिट माल और रोज़ के ख़र्च के लिए होती है, और आम तौर पर कैश क्रेडिट या ओवरड्राफ़्ट के रूप में मिलती है, जो हर साल रिन्यू होती है।

वर्किंग कैपिटल वाले हिस्से के लिए बैंक मुद्रा कार्ड दे सकता है — यह उसी लिमिट से जुड़ा RuPay डेबिट कार्ड है। आप ATM से पैसा निकाल सकते हैं या दुकान की मशीन पर सप्लायर को भुगतान कर सकते हैं, और जब भी बिक्री का पैसा आए, वापस जमा कर सकते हैं। ब्याज सिर्फ़ उतनी रक़म पर लगता है जितनी आपने सच में इस्तेमाल की, और उतने ही दिनों के लिए।

₹1,00,000 की वर्किंग कैपिटल लिमिट · 11% · एक साल · उदाहरण

अगर पूरी लिमिट साल भर निकली रहे≈ ₹11,000

अगर बिक्री रोज़ जमा हो और औसतन ₹40,000 ही इस्तेमाल में रहे≈ ₹4,400

सिर्फ़ बिक्री का पैसा खाते में डालने से बचा ब्याज≈ ₹6,600

इसकी एक और वजह है। जो लिमिट महीनों तक पूरी निकली पड़ी रहे और जिसमें कोई बिक्री न आए, रिन्यूअल के समय बैंक सबसे पहले उसी को देखता है। जो खाता रोज़ चलता है, वही सबसे बड़ा सबूत है कि आपका कारोबार असली है।

मुद्रा या PMEGP?

दोनों को अक्सर एक समझ लिया जाता है, जबकि ये अलग-अलग काम के हैं।

बातमुद्राPMEGP
सब्सिडीनहींप्रोजेक्ट लागत का 15% से 35%, तीन साल तक जमा रहती है
चलता हुआ कारोबारहाँनहीं — पहला लोन सिर्फ़ नई यूनिट को
सिर्फ़ वर्किंग कैपिटलहाँनहीं — प्रोजेक्ट में मशीन या स्थायी सामान होना ज़रूरी
ऊपरी सीमा₹20 लाख (तरुण प्लस)सब्सिडी ₹50 लाख तक के मैन्युफ़ैक्चरिंग और ₹20 लाख तक के सर्विस प्रोजेक्ट पर
आवेदनसीधे बैंक में, या ऑनलाइनKVIC पोर्टल पर, फिर एजेंसी, फिर बैंक
ट्रेनिंगज़रूरी नहींसब्सिडी से पहले EDP ट्रेनिंग ज़रूरी

अगर आप नई यूनिट लगा रहे हैं जिसमें मशीनें ख़रीदनी हैं, और लंबी प्रक्रिया का इंतज़ार कर सकते हैं, तो PMEGP की सब्सिडी असली फ़ायदा है। अगर कारोबार पहले से चल रहा है, माल या छोटी मशीन चाहिए, या पैसा जल्दी चाहिए, तो आम तौर पर मुद्रा सही रास्ता है। मुद्रा से शुरू होकर अच्छी चली यूनिट बाद में PMEGP के विस्तार लोन के लिए भी आवेदन कर सकती है।

इस सीरीज़ का भाग 1

PMEGP शुरू से आख़िर तक — पोर्टल, काग़ज़ और बैंक की मेज़

नई मैन्युफ़ैक्चरिंग या सर्विस यूनिट लगा रहे हैं? पढ़ें कि 15–35% सब्सिडी कैसे मिलती है, और वह आपके खाते में न आकर तीन साल की FD में क्यों रहती है।

ये काग़ज़ तैयार रखें

हर बैंक में थोड़ा फ़र्क़ होता है, और शिशु लोन में तरुण के मुक़ाबले बहुत कम काग़ज़ लगते हैं। ये वे काग़ज़ हैं जो सबसे ज़्यादा माँगे जाते हैं।

उद्यम रजिस्ट्रेशन मुफ़्त है और सरकारी पोर्टल पर कुछ मिनटों में हो जाता है। अगर नहीं है, तो आवेदन से पहले करवा लें — ज़्यादातर बैंक इसे माँगते हैं, और इसे दिखाना समझाने से आसान है।

पूरी प्रक्रिया, एक-एक क़दम

  1. रक़म और मक़सद तय करें

    लिखें कि पैसा ठीक-ठीक किस चीज़ में लगेगा — कौन-सी मशीन, कितना माल — और उसकी क़ीमत क्या है। कुल रक़म से आपकी श्रेणी तय होगी। इसे दो हिस्सों में बाँटें: कितना टर्म लोन होगा और कितना वर्किंग कैपिटल।

  2. पहले अपनी क्रेडिट रिपोर्ट देखें

    बैंक बाक़ी कुछ पढ़ने से पहले इसे निकालेगा। कोई पुराना बकाया क्रेडिट कार्ड या भूला हुआ "सेटल" लोन पूरी फ़ाइल रोक सकता है। ख़ुद देखें, और कोई ग़लत एंट्री हो तो आवेदन से पहले ठीक करवाएँ।

  3. कारोबार के काग़ज़ ठीक करें

    उद्यम रजिस्ट्रेशन, कारोबार के पते का प्रमाण, कोटेशन, और किशोर व उससे ऊपर के लिए एक सरल प्रोजेक्ट नोट — बिक्री, ख़र्च, और किस्त कहाँ से भरी जाएगी।

  4. आवेदन करें — बैंक में या ऑनलाइन

    अपने कारोबार के पास की बैंक शाखा में जाएँ, या सरकार के jansamarth.in पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करें, जो पात्रता जाँचकर आवेदन बैंकों तक भेजता है। पुराना udyamimitra.in पोर्टल भी मुद्रा आवेदन लेता है। दोनों पर कोई आवेदन फ़ीस नहीं है।

  5. बैंक की जाँच

    शाखा आपकी क्रेडिट रिपोर्ट निकालती है, कारोबार देखने आ सकती है, कोटेशन जाँचती है और बैंक स्टेटमेंट पढ़ती है। बड़े लोन पर देखा जाता है कि आपकी कमाई किस्त उठा पाएगी या नहीं।

  6. मंज़ूरी और साइन

    आपको सैंक्शन लेटर और KFS मिलता है। ब्याज, फ़ीस, अवधि, मार्जिन और सिक्योरिटी पढ़ें। आप लोन के काग़ज़ साइन करते हैं, और बैंक लोन से ख़रीदे जाने वाले सामान पर अपना हक़ (हाइपोथिकेशन) दर्ज करता है।

  7. पैसा जारी होना

    टर्म लोन का पैसा आम तौर पर कोटेशन के हिसाब से सीधे सप्लायर को जाता है। वर्किंग कैपिटल लिमिट कैश क्रेडिट या ओवरड्राफ़्ट खाते के रूप में खुलती है, अक्सर मुद्रा कार्ड के साथ।

  8. चुकाएँ, रिन्यू करें, आगे बढ़ें

    किस्तें समय पर भरें, बिक्री का पैसा खाते से घुमाते रहें, और हर साल वर्किंग कैपिटल लिमिट रिन्यू करवाएँ। ठीक से पूरा चुकाया गया तरुण लोन ही तरुण प्लस का दरवाज़ा खोलता है।

आवेदन से पहले (अंग्रेज़ी में)

How to read your CIBIL report — like a credit officer does

छोटे बिज़नेस लोन का फ़ैसला भी उसी क्रेडिट रिपोर्ट पर होता है जिस पर बाक़ी लोन का। अपनी रिपोर्ट वैसे ही पढ़ें जैसे बैंक पढ़ेगा।

मुद्रा की फ़ाइलें क्यों लौट आती हैं

योजना के लिए पात्र होना और लोन मंज़ूर होना, दो अलग बातें हैं। ये सबसे आम वजहें हैं, और लगभग सभी को आवेदन से पहले ठीक किया जा सकता है।

क्रेडिट रिपोर्ट। कोई बकाया खाता, राइट-ऑफ़ हुआ कार्ड, "सेटल" लोन, या हाल में बहुत सारी लोन पूछताछ। गारंटी होने से बैंक पुराना रिकॉर्ड नज़रअंदाज़ नहीं करता।

ऐसा कारोबार जो दिखे ही नहीं। न पते का प्रमाण, न रजिस्ट्रेशन, और बैंक खाते में कारोबार की कोई एंट्री नहीं। छोटे कारोबार के लिए बैंक स्टेटमेंट ही आय का प्रमाणपत्र है।

काम से मेल न खाती रक़म। चाय की दुकान के लिए ₹8 लाख माँगना। श्रेणी की सीमा एक ऊपरी हद है, हक़ नहीं।

कारोबार के नाम पर निजी ख़र्च। पुराना क़र्ज़ चुकाने, पारिवारिक समारोह या निजी गाड़ी के लिए माँगा गया लोन जाँच में पकड़ा जाता है।

पहले से भारी किस्तें। अगर मौजूदा EMI ही कारोबार की ज़्यादातर कमाई ले लेती हैं, तो नई किस्त की जगह नहीं बचती।

कारोबार से दूर की शाखा। बैंक को जगह देखनी और निगरानी करनी होती है। जहाँ काम करते हैं, वहीं पास में आवेदन करें।

पाँच ग़लतफ़हमियाँ, जिन्हें छोड़ देना चाहिए

"मुद्रा में सब्सिडी मिलती है।" नहीं मिलती। 2020 में कोविड के समय समय पर चुकाए गए शिशु लोन पर बारह महीने के लिए 2% ब्याज राहत दी गई थी। वह एक अस्थायी क़दम था, और आज योजना में कोई सब्सिडी नहीं है।

"कोई एजेंट या मुद्रा दफ़्तर लोन पास करवा देगा।" मुद्रा किसी व्यक्ति को सीधे लोन नहीं देती, आवेदन मुफ़्त है, और फ़ैसला सिर्फ़ बैंक का है। जो "फ़ाइल चार्ज" लेकर मुद्रा लोन पास करवाने की बात करे, वह आपको कुछ नहीं बेच रहा। फ़ीस के बदले "मुद्रा लोन मंज़ूर" का लेटर भेजना एक जानी-पहचानी धोखाधड़ी है।

"गारंटी नहीं चाहिए, तो जाँच भी नहीं होगी।" सरकारी गारंटी प्रॉपर्टी की जगह लेती है, जाँच की नहीं। बैंक फिर भी क्रेडिट रिपोर्ट और कारोबार देखता है, और लोन से ख़रीदे सामान पर हक़ दर्ज करता है।

"सरकार लोन माफ़ कर देगी।" मुद्रा लोन की कोई माफ़ी योजना नहीं है। लोन डूबने पर गारंटी बैंक का कुछ नुक़सान भरती है — आपका क़र्ज़ ख़त्म नहीं करती। डिफ़ॉल्ट आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दर्ज होता है और आगे के हर लोन में आपका पीछा करता है।

"मैं पात्र हूँ, तो बैंक को देना ही पड़ेगा।" योजना बताती है कि किसे लोन दिया जा सकता है। वह किसी बैंक को लोन देने के लिए मजबूर नहीं करती। साफ़ प्रोजेक्ट, साफ़ रिपोर्ट और दिखता हुआ कारोबार ही पात्रता को मंज़ूरी में बदलते हैं।

एक लाइन में

मुद्रा एक आम बिज़नेस लोन है जिसे पाना आसान बनाया गया है — न प्रॉपर्टी गिरवी, न सब्सिडी, और न जाँच से बचने का कोई शॉर्टकट। उतना ही माँगें जितना कारोबार सही ठहराए, पहले अपनी क्रेडिट रिपोर्ट साफ़ करें, बिक्री का पैसा खाते से घुमाते रहें, साइन से पहले KFS पढ़ें, और अगर कभी ₹20 लाख तक पहुँचना है तो तरुण लोन अच्छे से चुकाएँ।

इसके लिए टूल

EMI Calculator

लोन की रक़म, बैंक की बताई ब्याज दर और अवधि डालें, और आवेदन से पहले देख लें कि कारोबार को हर महीने कितनी किस्त उठानी होगी।

MoneyClarityTech डेस्क से — भारतीय बैंकिंग में काम करने वाले एक रिटेल-क्रेडिट प्रोफ़ेशनल द्वारा, जो हर दिन लोन फ़ाइलें, क्रेडिट रिपोर्ट और बैंक स्टेटमेंट पढ़ते हैं। सैकड़ों असली मामलों के अनुभव पर आधारित; किसी की पहचान उजागर नहीं की गई है। MoneyClarityTech के बारे में →